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बागपत के किसानों के लिए राहत या चेतावनी? 20 करोड़ बकाया, 30 अक्टूबर तक अल्टीमेटम

✍️ Aamir Raza · 🗓 28 Oct 2026 · ⏱ 5 मिनट में पढ़ें

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बागपत के किसानों के लिए राहत या चेतावनी? 20 करोड़ बकाया, 30 अक्टूबर तक अल्टीमेटम

बागपत के गन्ना किसानों के लिए इस हफ्ते दो खबरें एक साथ आई हैं। एक तरफ जिले की तीनों चीनी मिलों का नया पेराई कैलेंडर तय हो गया है, दूसरी तरफ दो बाहर की मिलों पर अब भी 20 करोड़ रुपये का गन्ना बकाया अटका हुआ है। जिला गन्ना अधिकारी ने दोनों मिलों को एक सप्ताह के अंदर भुगतान करने का नोटिस जारी किया है। अगर इस हफ्ते पैसा नहीं आया तो मामला फिर गरम सकता है, क्योंकि किसान संगठन पहले ही 30 अक्टूबर तक की समयसीमा दे चुके हैं।

29 करोड़ से घटकर 20 करोड़, पर कहानी खत्म नहीं हुई

सबसे पहले आंकड़ों को साफ समझ लीजिए। अमर उजाला की 28 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक किनौनी चीनी मिल पर 14 करोड़ रुपये और भैंसाना चीनी मिल पर 6 करोड़ रुपये बकाया है। दोनों को जोड़ें तो रकम 20 करोड़ रुपये बनती है। दिलचस्प बात यह है कि सिर्फ 16 दिन पहले, 12 अक्टूबर को, यही बकाया 29 करोड़ रुपये था। तब किनौनी पर 20 करोड़ और भैंसाना पर 9 करोड़ रुपये बकाया बताए गए थे।

इसका मतलब यह हुआ कि बीते दो हफ्तों में करीब 9 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। यह प्रगति है, पर 20 करोड़ रुपये अब भी किसानों की जेब से बाहर हैं। पेराई सत्र सिर पर है और किसान का अगला खर्च, बीज, खाद और मजदूरी, इसी पैसे से चलना है। इसलिए प्रशासन ने अब नोटिस का रास्ता अपनाया है। जिला गन्ना अधिकारी अशर्फी लाल ने दोनों मिलों को एक सप्ताह में बकाया चुकाने के निर्देश दिए हैं और भुगतान न होने पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी है। मिल प्रबंधन की ओर से पेराई सत्र शुरू होने से पहले भुगतान का आश्वासन दिया गया है।

30 अक्टूबर का अल्टीमेटम क्या है

नोटिस की तारीख और किसान संगठनों की चेतावनी लगभग एक ही समय पर आकर मिल रही है। हिंदुस्तान की 22 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक बागपत में किसान दिवस के मौके पर विकास भवन में हुई बैठक में यह मुद्दा जोरदार तरीके से उठा था। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी अनिल कुमार सिंह ने की थी। उसमें भाकियू नेता बिजेंद्र प्रधान ने कहा था कि अगर 30 अक्टूबर तक किनौनी और भैंसाना मिलों का गन्ना बकाया भुगतान नहीं हुआ तो किसान आंदोलन शुरू करेंगे और दोनों मिलों को गन्ना नहीं देंगे।

यह चेतावनी सिर्फ बयानबाजी नहीं है। बागपत के किसान पहले भी कई बार अफसरों से भुगतान की मांग कर चुके हैं। अब जब पेराई सत्र शुरू होने वाला है, तब बकाया भुगतान का दबाव सबसे ज्यादा असरदार होता है। मिल को गन्ना चाहिए और किसान को उसका पुराना पैसा।

बागपत की तीनों मिलों का कैलेंडर तय

बकाया विवाद के बीच जिले के किसानों के लिए एक अच्छी खबर भी है। जिले की तीनों चीनी मिलों का पेराई कैलेंडर तैयार हो गया है। मलकपुर चीनी मिल 31 अक्टूबर से चालू हो जाएगी। रमाला चीनी मिल 2 नवंबर से और बागपत चीनी मिल 5 नवंबर से पेराई शुरू करेगी। रिपोर्ट के मुताबिक तीनों मिलों में पेराई सत्र की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

किसानों के काम की सबसे अहम जानकारी यह है कि पेराई शुरू होने से दो दिन पहले इंडेंट जारी होगा और पक्की पर्ची दी जाएगी। यानी मलकपुर से जुड़े किसानों को 29 अक्टूबर के आसपास इंडेंट मिलने की उम्मीद रखनी चाहिए। कर्मचारियों को इस काम में लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

सवा लाख किसान, 12 मिलें, 85 हजार हेक्टेयर

बागपत की कहानी सिर्फ तीन मिलों की नहीं है। जिले में करीब 85 हजार हेक्टेयर में गन्ने की खेती होती है और करीब सवा लाख किसान गन्ना आपूर्ति करते हैं। वे जिले की तीन मिलों के अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली, हापुड़ और गाजियाबाद की कुल 12 मिलों को गन्ना भेजते हैं। इसीलिए किसी एक मिल का बकाया भी हजारों किसानों को प्रभावित करता है।

रिपोर्ट के मुताबिक बागपत जिले की तीनों मिलों ने किसानों का भुगतान पूरा कर लिया है। समस्या उन बाहर की मिलों की है, जहां बागपत के किसानों का गन्ना जाता है। यही फर्क समझना जरूरी है। जिले की मिलें चालू हो रही हैं, पर जिन किसानों का गन्ना किनौनी या भैंसाना मिल को गया था, उनका पैसा अब भी अटका है। ऐसे किसानों को अपनी पर्ची और भुगतान की रसीदें संभालकर रखनी चाहिए।

किसान पर इसका क्या असर पड़ेगा

अगर एक सप्ताह के नोटिस के अंदर 20 करोड़ रुपये का भुगतान हो जाता है तो नया पेराई सत्र साफ स्लेट से शुरू होगा। अगर भुगतान अटकता है तो 30 अक्टूबर के बाद आंदोलन की चेतावनी के चलते आपूर्ति प्रभावित हो सकती है और पेराई के शुरुआती दिनों में तौल केंद्रों पर अव्यवस्था फैल सकती है।

इसलिए इस हफ्ते किसानों को तीन काम जरूर करने चाहिए। पहला, अपनी मिल का इंडेंट और पर्ची मिलने की तारीख नोट कर लें। दूसरा, पिछले सत्र के बकाया भुगतान की स्थिति अपनी समिति या जिला गन्ना अधिकारी कार्यालय से पता कर लें। तीसरा, भुगतान न मिलने की शिकायत लिखित में दर्ज कराएं, ताकि वह रिकॉर्ड में रहे। गन्ना विभाग के टोल-फ्री नंबर 1800-121-3203 पर भी जानकारी ली जा सकती है।

मुख्य बातें

  • किनौनी मिल पर 14 करोड़ और भैंसाना मिल पर 6 करोड़ रुपये, कुल 20 करोड़ रुपये बकाया है।
  • जिला गन्ना अधिकारी ने दोनों मिलों को एक सप्ताह में भुगतान का नोटिस दिया है।
  • किसान संगठनों ने 30 अक्टूबर तक भुगतान न होने पर आंदोलन और गन्ना न देने की चेतावनी दी है।
  • मलकपुर 31 अक्टूबर, रमाला 2 नवंबर और बागपत मिल 5 नवंबर से पेराई शुरू करेंगी; इंडेंट दो दिन पहले जारी होगा।

स्रोत: अमर उजाला (बागपत, 28 अक्टूबर 2026 और 12 अक्टूबर 2026), हिंदुस्तान (बागपत, 22 अक्टूबर 2026)

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Aamir Raza
लेखक

GannaUP के संस्थापक एवं मुख्य संपादक। UP गन्ना उद्योग, पर्ची प्रणाली, SAP/FRP मूल्य नीति और किसान अधिकारों पर 10+ वर्षों का जमीनी अनुभव।

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