आजमगढ़ में 45 मिनट की आंधी-ओलावृष्टि: गन्ना गिरा, धान तबाह — किसान बोले, तौल में छूट दो

सोमवार 5 अक्टूबर की दोपहर करीब 3 बजे आजमगढ़ के आसमान ने अचानक रुख बदला और महज 45 मिनट में वह कर दिया जिसके लिए किसान कई महीनों की मेहनत बटोरते हैं। तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश हुई और बूढ़नपुर व अहरौला इलाकों में ओले भी गिरे। पेड़ उखड़कर सड़कों पर जा गिरे, कई गांवों की मड़ई और टीनशेड उड़ गए, हाईटेंशन लाइन के पोल टूटने से घंटों बिजली ठप रही। लेकिन सबसे बड़ा झटका खेतों को लगा: पककर तैयार धान और खड़ा गन्ना जमीन पर बिछ गया।
हिंदुस्तान की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक रानी की सराय में पेड़ गिरने से बिजली के तार टूटे और दो घंटे बाद भी बिजली कर्मचारी नहीं पहुंचे। पवई-बरदह में दर्जन भर परिवारों की मड़ई और टीनशेड उड़ गए, मार्टीनगंज में कुशलगांव मार्ग पर पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हुआ और जहानागंज में पुलिस को जेसीबी से पेड़ हटवाना पड़ा।
गन्ना किसानों को यह नुकसान डबल मार क्यों है
धान का नुकसान तो सीधा दिखता है, लेकिन गिरे गन्ने का नुकसान छिपा और लंबा होता है। जमीन पर बिछा गन्ना दोबारा खड़ा नहीं होता, बढ़वार रुक जाती है और कीचड़-मिट्टी चिपकने से तौल और गुणवत्ता दोनों घटती हैं। सबसे बड़ी चिंता पेराई के समय की है: मिलों और क्रय केंद्रों पर गिरे गन्ने की तौल में कटौती यानी घटतौली का खतरा बढ़ जाता है। और चीनी परता भी घट सकती है, क्योंकि लंबे समय तक जमीन पर पड़े गन्ने की रिकवरी कम होती जाती है।
यही वजह है कि किसान संगठनों की सबसे जोरदार मांग गन्ने की तौल से जुड़ी है: आपदा में गिरे गन्ने पर कटौती नहीं होनी चाहिए, क्योंकि इसमें किसान की कोई गलती नहीं। गिरे गन्ने की सफाई, छिलाई और बंधाई में वैसे भी अतिरिक्त मेहनत और खर्च आता है, कटौती लगेगी तो यही दोहरी मार बन जाएगी।
किसान संगठनों की मांगें: सर्वे में किसान भी शामिल हों
सोशलिस्ट किसान सभा के महासचिव राजीव यादव और पूर्वांचल किसान यूनियन के महासचिव वीरेंद्र यादव ने सरकार के सामने स्पष्ट मांगें रखी हैं। उनकी पहली मांग है कि राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराया जाए। दूसरी मांग यह है कि सर्वे में किसान संगठनों के प्रतिनिधि भी शामिल हों, ताकि नुकसान का सही आकलन हो सके और रिपोर्ट कागजों तक सीमित न रह जाए।
नेताओं का कहना है कि अगेती धान की फसल जमीन पकड़ चुकी है, ओलों से दाने झड़ गए हैं और लौकी, नेनुआ, भिंडी, बैंगन, टमाटर समेत सब्जियों की फसलें पूरी तरह नष्ट होने का दावा है। उनकी मांग है कि प्रभावित किसानों को तत्काल मुआवजा मिले, फसल बीमा का लाभ बिना अड़चन के दिया जाए और गिरे गन्ने की तौल में छूट तय हो। चेतावनी दी गई है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो संगठन आंदोलन को बाध्य होंगे।
सिर्फ आजमगढ़ नहीं: पूरा पूर्वांचल बारिश की चपेट में
यह आंधी-बारिश अकेले आजमगढ़ तक सीमित नहीं रही। दैनिक जागरण की 5 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार वाराणसी, मिर्जापुर और आजमगढ़ मंडलों में भारी बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं ने फसलों को गंभीर नुकसान पहुंचाया। ईटीवी भारत की 8 अक्टूबर की रिपोर्ट बताती है कि मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के 30 जिलों के लिए बारिश का अलर्ट जारी किया था, जिनमें आजमगढ़, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और बलिया समेत पूरा पूर्वांचल शामिल था। पिछले 24 घंटों में प्रदेश में अनुमान से 48 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज हुई, अंबेडकर नगर में 36 मिलीमीटर और लखीमपुर खीरी में 23 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई।
अक्टूबर की यह बारिश गन्ना किसानों के लिए खास मुसीबत है, क्योंकि यही समय फसल के पकने और पेराई सत्र की तैयारी का है। गिरे गन्ने की कटाई-ढुलाई टालने से सड़न और घटतौली का खतरा और बढ़ता है, इसलिए काम में देर न करना ही समझदारी है।
प्रभावित किसान अभी क्या करें
मुआवजे और सर्वे की कार्रवाई में समय लग सकता है, लेकिन किसान अभी से कुछ कदम उठाकर अपना दावा मजबूत कर सकते हैं। सबसे पहले खेत में गिरी फसल की तारीख और समय वाली तस्वीरें मोबाइल में सुरक्षित रखें, ये सर्वे और बीमा दावे में सबूत का काम करेंगी। अपने पटवारी, गन्ना समिति और कृषि विभाग के क्षेत्रीय अधिकारी को नुकसान की लिखित सूचना दें, ताकि आपका नाम प्रभावित किसानों की सूची में दर्ज हो सके।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना वाले किसान नुकसान के 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर सूचना दर्ज कराएं, देर पर दावा खारिज हो सकता है। गिरे गन्ने की कटाई, सफाई और ढुलाई का खर्च लिखकर रखें, तौल में छूट की मांग संगठन स्तर पर उठ चुकी है और यह रिकॉर्ड काम आएगा। राहत से जुड़ी सिर्फ आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें, अफवाहों पर नहीं।
मुख्य बातें
- 5 अक्टूबर को आजमगढ़ में 45 मिनट की आंधी-ओलावृष्टि से धान, गन्ना और सब्जियों की फसलें बर्बाद हुईं; बूढ़नपुर-अहरौला में ओले भी गिरे।
- किसान संगठन राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम से तत्काल सर्वे, सर्वे में किसान प्रतिनिधियों की भागीदारी, मुआवजे और फसल बीमा की मांग कर रहे हैं।
- गन्ना किसानों की खास मांग: गिरे गन्ने की तौल में छूट, ताकि घटतौली की मार से बचा जा सके। फसल बीमा वाले किसान 14447 पर 72 घंटे के भीतर सूचना दर्ज कराएं।
स्रोत: हिंदुस्तान (लाइव हिंदुस्तान), 5 अक्टूबर 2026; दैनिक जागरण, 5 अक्टूबर 2026; ईटीवी भारत, 8 अक्टूबर 2026; बसावन इंडिया और समाचार इंडिया लाइव, 6 अक्टूबर 2026 (किसान संगठनों की मांगें)।
