25 अक्टूबर से चलीं अमरोहा-मुजफ्फरनगर की मिलें, पर गन्ने का दाम अभी तय नहीं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का इंतजार खत्म होने को है। अमरोहा की मिलें 25 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच चल पड़ेंगी और मुजफ्फरनगर की आठों मिलों की पेराई तारीखें भी तय हो चुकी हैं। मंसूरपुर का सत्र 24 अक्टूबर से और बुढ़ाना मिल 25-26 अक्टूबर को चलेगी।
पर इस अच्छी खबर के बीच एक बड़ा सवाल अब भी लटका है। 2026-27 के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य (SAP) अभी घोषित नहीं हुआ है। किसान गन्ना तो मिल को देने जा रहे हैं, पर उन्हें यह नहीं पता कि इस साल प्रति क्विंटल कितना दाम मिलेगा।
अमरोहा: तीन मिलें, 1.68 लाख किसान
अमरोहा में हसनपुर, धनौरा और चंदनपुर की मिलें पेराई की तैयारी में जुटी हैं, मरम्मत का काम लगभग पूरा है। जिला गन्ना अधिकारी मनोज कुमार के मुताबिक बारिश की वजह से संचालन करीब एक सप्ताह लेट हुआ है, अब 25 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच मिलें चलेंगी।
इस बार जिले में गन्ने की खेती बढ़ी है। 1.68 लाख किसान गन्ने से जुड़े हैं और इस साल 1.2 लाख हेक्टेयर में गन्ना लगा है, जबकि पिछले साल यह रकबा 98 हजार हेक्टेयर था। रकबा बढ़ने से मिलों पर पेराई का दबाव भी ज्यादा रहेगा, इसलिए पर्ची का कैलेंडर समय पर मिलना और भी जरूरी है।
मुरादाबाद मंडल के आवंटन में सात मिलों को कुल 110.52 लाख क्विंटल गन्ना और 76 क्रय केंद्र मिले हैं, इसमें चंदनपुर मिल के लिए 9.30 लाख क्विंटल तय है।
मुजफ्फरनगर: आठ मिलों का पूरा कैलेंडर
मुजफ्फरनगर की आठों मिलों की तारीखें घोषित हो चुकी हैं। धामपुर बायो ऑर्गेनिक मंसूरपुर 24 से 26 अक्टूबर, बजाज हिंदुस्तान बुढ़ाना 25 से 26 अक्टूबर, उत्तम खैखेड़ी 27 से 28 अक्टूबर, टिकौला 28 से 29 अक्टूबर, इंडियन पोटाश रोहाना कलां 29 से 30 अक्टूबर, गंगा सहकारी मोरना और इंडियन पोटाश तितावी 30 से 31 अक्टूबर, और सबसे बड़ी मिल त्रिवेणी खतौली 1 से 2 नवंबर को पेराई शुरू करेगी।
जिले में करीब सवा दो लाख किसानों को प्राथमिक सप्लाई कैलेंडर बांटे गए हैं। जिन्हें कैलेंडर नहीं मिला, वे समिति पर बेसिक कोटा और पर्ची की जानकारी दुरुस्त करा सकते हैं। मोरना मिल पर किसान 25 अक्टूबर से पेराई की मांग को लेकर धरना भी दे चुके हैं।
पर्ची SMS पर आएगी, मोबाइल अपडेट रखें
इस सत्र में भी पर्ची SMS से मिलेगी। विभाग ने कहा है कि रिकॉर्ड में दर्ज मोबाइल नंबर ठीक रखें और फोन का इनबॉक्स खाली रखें। नंबर बदल गया हो या फोन में जगह न हो तो पर्ची का SMS अटक सकता है और सेंटर पर गन्ना डालने में देरी हो सकती है।
पर्ची मिलने के बाद तौल और सेंटर की जानकारी ध्यान से देखें। गलत सेंटर पर गन्ना ले जाने से समय और किराया दोनों बर्बाद होते हैं, और गड़बड़ी दिखे तो तुरंत समिति से संपर्क करें।
कोल्हू पर 380 रुपये, पर जल्दबाजी महंगी पड़ सकती है
मिलों के सत्र से पहले ही मुजफ्फरनगर में 50 से ज्यादा कोल्हू चलने लगे हैं, जहां औसतन 380 रुपये प्रति क्विंटल भाव मिल रहा है। सरसों या अगेती गेहूं बोने वाले किसानों ने गन्ना बेचना शुरू भी कर दिया है।
पर जिनकी पर्ची एक-दो दिन में आने वाली है, उनके लिए कोल्हू पर जल्दबाजी में गन्ना बेचना घाटे का सौदा हो सकता है। मिल का भाव और भुगतान की गारंटी कोल्हू से अलग होती है, इसलिए पहले पर्ची की तारीख देख लें।
गन्ने का दाम: 600 रुपये की मांग, सरकार से फैसला बाकी
सबसे बड़ा मुद्दा अब भी गन्ने का भाव है। भारतीय किसान यूनियन शंकर ने अमरोहा में मांग उठाई है कि सरकार पहले 600 रुपये प्रति क्विंटल मूल्य घोषित करे, फिर मिलें चलें। संगठन ने चेतावनी दी है कि 27 अक्टूबर तक समाधान न हुआ तो 28 अक्टूबर की पंचायत में आंदोलन की घोषणा होगी।
राष्ट्रीय लोक दल ने भी मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 2026-27 के लिए SAP बढ़ाने की मांग की है। पिछले सत्र में सरकार ने 30 रुपये प्रति क्विंटल की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की थी, पर पार्टी का कहना है कि बढ़ती लागत के बीच इस बार फिर संशोधन जरूरी है।
किसानों के लिए इसका मतलब साफ है। गन्ना देते समय भाव की स्थिति साफ नहीं है, 2026-27 SAP की घोषणा अभी बाकी है, इसलिए पुराने सत्र के भाव को इस साल का भाव न समझें। चौदह दिन में भुगतान का नियम पहले जैसा ही है।
गेहूं की बुवाई के लिए खेत खाली करना भी जरूरी
पेराई की तारीखों का सीधा असर गेहूं की बुवाई पर पड़ता है। अगेती गेहूं बोने वालों के पास कटाई और खेत की तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा है, मिलें समय पर चलेंगी तो खेत समय पर खाली होंगे।
इस हफ्ते चार काम जरूर कर लें: मोबाइल नंबर और इनबॉक्स ठीक रखें, पर्ची और सेंटर जांच लें, बेसिक कोटा की गड़बड़ी समिति पर दर्ज कराएं और गेहूं की बुवाई का सामान तैयार रखें।
मुख्य बातें
- अमरोहा की तीन मिलें 25 अक्टूबर से 1 नवंबर के बीच और मुजफ्फरनगर की आठ मिलें 24 अक्टूबर से 2 नवंबर के बीच पेराई शुरू कर रही हैं।
- गन्ना पर्ची SMS पर मिलेगी, इसलिए विभाग में दर्ज मोबाइल नंबर और इनबॉक्स ठीक रखना जरूरी है।
- 2026-27 का SAP अभी घोषित नहीं हुआ है, किसान संगठन 600 रुपये प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं और 28 अक्टूबर को आगे की रणनीति तय हो सकती है।
स्रोत: अमर उजाला (14 और 23 अक्टूबर 2026), रॉयल बुलेटिन (20 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (17 अक्टूबर 2026)
