आंधी से गिरे गन्ने पर ₹30,000/एकड़ मुआवजे की मांग उठी

देवरिया के भाटपाररानी इलाके के छोटका गांव में रविवार को किसान सभा की बैठक हुई। एजेंडा एक ही था: बीते तीन दिनों की तेज आंधी और मूसलाधार बारिश ने धान और गन्ने की फसल को कितना नुकसान पहुंचाया, और अब किसान को मुआवजा कैसे मिलेगा। बैठक की अध्यक्षता कर रहे उत्तर प्रदेश किसान सभा के संयुक्त सचिव साधुशरण ने जिला प्रशासन से प्रभावित किसानों को ₹30,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने की मांग रखी। बैठक में मौजूद किसानों ने बताया कि तेज हवा के झोंकों से गन्ना जमीन पर बिछ गया है और धान की फसल पानी में डूबी है। जयप्रकाश यादव, नथुनी सिंह, पौहारी कुशवाहा, रमाकांत यादव और रमावती देवी समेत दर्जनों किसान बैठक में शामिल थे।
किसान सभा की तीन ठोस मांगें
बैठक से जिला प्रशासन के नाम तीन मांगें पारित की गईं। पहली, फसल गंवाने वाले हर किसान को ₹30,000 प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाए। दूसरी, राजस्व और कृषि विभाग की संयुक्त टीम बनाकर गांव-गांव जाकर फसलों के नुकसान का वास्तविक सर्वे कराया जाए। तीसरी, जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा कराया है, उन्हें नियमानुसार बीमा क्षतिपूर्ति दिलाई जाए।
साधुशरण ने कहा कि तेज हवा से गन्ने की फसल जमीन पर बिछ गई है। अगर सर्वे में वास्तविक नुकसान का आकलन न किया गया तो किसान बर्बाद हो जाएंगे। दो दिन पहले ही जिले में तीन दिनों की बारिश और तेज हवाओं से खड़ी धान की फसल गिरने की खबर आई थी।
खेतों का हाल: उतरौला से पूर्वांचल तक गन्ना जमींदोज
आंधी-तूफान का असर सिर्फ देवरिया तक सीमित नहीं है। बलरामपुर के उतरौला विकासखंड में तीन दिन की बारिश और तेज हवाओं ने धान, गन्ना, आम, सागौन और लिप्टस के पेड़ों तक को जमींदोज कर दिया। तिलखी बढ़या, बभनी बुजुर्ग और मटियरिया कर्मा समेत दर्जनों गांवों के खेत चारों तरफ से पानी से घिर गए। किसान गोपाल चौधरी और दिलीप कुमार मिश्र ने बताया कि हजारों एकड़ में लगी फसल डूबी हुई है। अगर दो दिन में पानी नहीं उतरा तो पूरी फसल सड़कर बर्बाद हो जाएगी।
राहत आयुक्त डॉ. हृषिकेश भास्कर यशोद के ताजा आंकड़े इस तबाही की भयावहता दिखाते हैं। 25 से 27 सितंबर की सुबह तक प्रदेश में 66.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज हुई, जबकि सामान्य बारिश इस अवधि में महज 7.6 मिलीमीटर होती है। यानी प्रदेश में सामान्य से 775 प्रतिशत अधिक बारिश हुई और 75 में से 56 जिलों में अतिवृष्टि दर्ज की गई। फर्रुखाबाद में तो सामान्य से 7385 प्रतिशत अधिक वर्षा रिकॉर्ड की गई।
पिछले 60 घंटों में प्रदेश में 56 लोगों की जान गई, 46 घायल हुए, 107 पशुओं की मौत हुई और 1021 मकान क्षतिग्रस्त हुए। सबसे ज्यादा जनहानि सीतापुर में दर्ज हुई, जहां सात लोगों की मौत हुई। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच मौतें हुईं।
गिरा हुआ गन्ना क्यों है बड़ा नुकसान
गन्ना सिर्फ गिरता नहीं, गिरने के साथ उसकी कीमत भी घटती है। जमीन पर पड़े गन्ने में गांठों के आसपास फटने और सड़न का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक पड़ा रहा गन्ना पेराई के समय चीनी की रिकवरी घटा देता है। यानी जिसका गन्ना समय पर नहीं उठेगा, उसे मिल में भी कम भाव या कम तौल की मार झेलनी पड़ सकती है। नुकसान खेत तक सीमित नहीं रहता, यह पेराई सत्र तक किसान का पीछा करता है।
यही वजह है कि किसान सभा ने ₹30,000 प्रति एकड़ की दर से मुआवजे की मांग रखी है। फसल तैयार करने में खाद, बीज, सिंचाई और जुताई पर हजारों रुपये पहले ही खर्च हो चुके हैं, और अब बारिश व आंधी ने पूरी पूंजी डूबो दी है।
मुआवजे का रास्ता: फसल बीमा वालों के लिए 72 घंटे का नियम
जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसल का बीमा कराया है, उनके लिए सबसे जरूरी बात समय है। जलभराव, आंधी-तूफान, बाढ़, आकाशीय बिजली या बेमौसम बारिश से नुकसान होने पर फसल क्षति की सूचना नुकसान के 72 घंटे के भीतर टोल फ्री नंबर 14447 पर दर्ज कराना अनिवार्य है। समय-सीमा के बाद दी गई सूचना मान्य नहीं मानी जाती।
शिकायत दर्ज कराते समय किसान को अपना आधार कार्ड नंबर बताना होता है। अगर आधार से जानकारी दर्ज नहीं हो पाती, तो उस बैंक शाखा से संपर्क करें जहां से फसल का बीमा कराया गया है। इसके बाद बीमा कंपनी मौके पर सर्वे करके नुकसान का आकलन करती है।
अब किसान क्या करें
खेत में नमी कम होते ही गिरे गन्ने को बांधकर दोबारा खड़ा करने का काम शुरू करें। देर होने पर गन्ना सड़ सकता है। खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने की व्यवस्था सबसे पहले दुरुस्त करें, क्योंकि भरे पानी से जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है। सर्वे टीम जब खेत पर आए, तो नुकसान का पूरा ब्योरा और फोटो पहले से तैयार रखें।
मुख्य बातें
- देवरिया में किसान सभा की बैठक में आंधी-बारिश से गिरे गन्ने पर ₹30,000/एकड़ मुआवजे, गांव-गांव सर्वे और फसल बीमा क्षतिपूर्ति की मांग रखी गई।
- राहत आयुक्त के आंकड़ों के मुताबिक 60 घंटों में 56 मौतें, 46 घायल, 107 पशुहानि और 1021 मकान क्षतिग्रस्त; प्रदेश में सामान्य से 775% अधिक बारिश दर्ज।
- बीमित फसल के नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर टोल फ्री 14447 पर दर्ज कराएं, साथ ही तहसील से संपर्क कर सर्वे में नुकसान दर्ज करवाएं।
स्रोत: दैनिक जागरण (27 सितंबर 2026, देवरिया किसान सभा बैठक; 28 सितंबर 2026, राहत आयुक्त आंकड़े), Dynamite News (27 सितंबर 2026), हिंदी संवाद (बलरामपुर-उतरौला रिपोर्ट), नित्य समाचार व अतुल्य भारत चेतना (फसल बीमा टोल फ्री 14447)।
