₹5,500 की मांग पर 26 नवंबर की डेडलाइन: यूपी के गन्ना SAP पर पड़ेगा असर

उत्तर प्रदेश का गन्ना किसान इस समय दो चीजों का इंतजार कर रहा है: पेराई सत्र कब शुरू होगा, और इस साल का गन्ना भाव (एसएपी) कितना तय होगा। सोमवार शाम को कर्नाटक से आई खबर ने इस इंतजार को एक तारीख दे दी है। कर्नाटक के गन्ना किसानों ने अपना सप्ताह भर का आंदोलन अस्थायी रूप से रोक दिया, लेकिन केंद्र सरकार को 26 नवंबर तक मांगें मानने की मोहलत दी है।
यह खबर सिर्फ कर्नाटक की नहीं है। यूपी में भी ₹600 प्रति क्विंटल भाव की मांग चल रही है और 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ। कर्नाटक का फैसला देश भर के गन्ना मूल्य को प्रभावित करेगा।
सोमवार को धारवाड़ में क्या तय हुआ
कर्नाटक के किसान नेताओं के आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के साथ बैठक रविवार रात करीब 12:30 बजे शुरू हुई और सुबह 3:30 बजे तक चली। प्रतिनिधिमंडल में कर्नाटक राज्य रैता संघ और हसीरू सेने के अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी और मानद अध्यक्ष शशिकांत गुरुजी शामिल थे। (द साउथ फर्स्ट, 19 अक्टूबर 2026; न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)
सोमवार दोपहर हावेरी का जत्था धारवाड़ के बाहरी इलाके यरिकोप्पा और बेलगावी का जत्था तेगुर होकर पहुंचा। शाम को यरिकोप्पा में चर्चा के बाद आंदोलन स्थगित करने का ऐलान हुआ। (द हिंदू, 19 अक्टूबर 2026)
₹5,500 की मांग के पीछे तीन बड़े मुद्दे
किसानों की मांगें सीधी हैं। गन्ने का भाव मौजूदा ₹3,650 प्रति टन से बढ़ाकर ₹5,500 प्रति टन किया जाए। क्विंटल के हिसाब से यह मौजूदा ₹365 से बढ़ाकर ₹550 की मांग के बराबर है। साथ में चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य को ₹31 से बढ़ाकर ₹60 प्रति किलो करने की मांग है। किसानों का कहना है कि चीनी का एमएसपी 2019 से नहीं बढ़ा है, जबकि खेती की लागत लगातार बढ़ी है। इसके अलावा गन्ने से बने इथेनॉल की खरीद नीति की समीक्षा की मांग है। तौल और शर्करा रिकवरी दर में पारदर्शिता और समय पर भुगतान की मांग भी है। (द साउथ फर्स्ट, 19 अक्टूबर 2026; डेक्कन हेराल्ड, 19 अक्टूबर 2026)
मंत्री ने भरोसा दिया कि मांगें केंद्र की उपयुक्त समिति के सामने रखी जाएंगी। किसान नेताओं के मुताबिक यह समिति दो दिनों में कर्नाटक आएगी। (न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)
26 नवंबर की डेडलाइन का मतलब
स्थगन के साथ किसान नेताओं ने चेतावनी साफ कर दी है: केंद्र और राज्य सरकार को 26 नवंबर 2026 तक मांगें पूरी करनी होंगी, वरना 27 नवंबर से आंदोलन फिर शुरू होगा। इस बार हुब्बल्लि में मंत्री प्रल्हाद जोशी के आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है, जिसमें जरूरत पड़ने पर एक करोड़ किसान जुटाने की बात कही गई है। (द हिंदू, 19 अक्टूबर 2026; चीनीमंडी, 19 अक्टूबर 2026)
23 अक्टूबर से मिलें चलाने पर सहमति
बैठक में 23 अक्टूबर से चीनी मिलें चलाने पर सहमति बनी है। किसान नेताओं की मांग है कि मिलें शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री मिल प्रबंधकों के साथ बैठक कर सभी किसानों के लिए एकसमान गन्ना भाव तय कराएं। मंत्री जोशी ने यरिकोप्पा में कहा कि गन्ना किसानों को एकसमान भाव दिलाना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। (न्यू इंडियन एक्सप्रेस, 20 अक्टूबर 2026)
चुनप्पा पुजेरी ने मांग की है कि अगले चार-पांच दिनों में बेलगावी के सुवर्ण विधान सौध में चीनी मिल मालिकों और किसान नेताओं की बैठक बुलाई जाए, ताकि मिल गेट पर एकसमान भाव तय हो सके। (चीनीमंडी, 19 अक्टूबर 2026)
यूपी के किसान के लिए तीन सीधे मतलब
पहला, केंद्र ने 14 अक्टूबर को गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की समस्याओं की जांच के लिए समिति गठित की है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता वाली यह समिति एफआरपी वृद्धि, चीनी के एमएसपी में संशोधन और तौल की पारदर्शिता जैसे मुद्दों की समीक्षा करेगी। कर्नाटक की मांगें इसी समिति के सामने जाएंगी, और इसकी रिपोर्ट का असर राष्ट्रीय गन्ना मूल्य नीति पर पड़ेगा। (किसान समाधान, 15 अक्टूबर 2026; किसान तक, 15 अक्टूबर 2026)
दूसरा, यूपी में एसएपी की घोषणा अभी बाकी है। पिछले सत्र (2025-26) में एसएपी ₹400 प्रति क्विंटल (अगेती) था। इस बार किसान संगठन ₹600 प्रति क्विंटल की मांग कर रहे हैं। 7 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना आयुक्त कार्यालय में हुई उपसमिति की बैठक में बलरामपुर सहकारी गन्ना विकास समिति के प्रतिनिधि रणवीर सिंह रन्नू ने यह मांग रखी थी। (चीनीमंडी, 9 अक्टूबर 2026)
तीसरा, दबाव बढ़ रहा है। भाकियू अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा है कि गन्ने का मूल्य ₹600 प्रति क्विंटल से कम नहीं होना चाहिए, और 23 अक्टूबर को लखनऊ के गन्ना भवन में किसानों की महापंचायत बुलाई गई है। (जागरण, 18 अक्टूबर 2026) संयुक्त किसान मोर्चा ने भी 23 अक्टूबर को जिलाधिकारी कार्यालयों में प्रदर्शन का ऐलान किया है। (किसान इंडिया, 18 अक्टूबर 2026)
कर्नाटक की 26 नवंबर की डेडलाइन और केंद्र की समिति की रिपोर्ट, दोनों यूपी के एसएपी के फैसले को प्रभावित कर सकते हैं। भाव की लड़ाई अब एक राज्य की नहीं, राष्ट्रीय स्तर की बन गई है।
मुख्य बातें
- कर्नाटक के गन्ना किसानों ने जोशी से आधी रात की बैठक के बाद आंदोलन स्थगित किया; केंद्र को 26 नवंबर तक की मोहलत, 27 से फिर प्रदर्शन की चेतावनी।
- मांगें: गन्ना भाव ₹3,650 से ₹5,500 प्रति टन, चीनी एमएसपी ₹31 से ₹60 प्रति किलो, इथेनॉल नीति की समीक्षा; केंद्र की 14 अक्टूबर की समिति (अध्यक्ष प्रो. रमेश चंद) इन पर विचार करेगी।
- यूपी में 2026-27 का एसएपी अभी घोषित नहीं हुआ; ₹600 प्रति क्विंटल की मांग पर 23 अक्टूबर को लखनऊ महापंचायत और जिलों में प्रदर्शन तय है।
स्रोत: द हिंदू (19 अक्टूबर 2026), द साउथ फर्स्ट (19 अक्टूबर 2026), डेक्कन हेराल्ड (19 अक्टूबर 2026), न्यू इंडियन एक्सप्रेस (20 अक्टूबर 2026), चीनीमंडी (19 अक्टूबर 2026), किसान समाधान (15 अक्टूबर 2026), किसान तक (15 अक्टूबर 2026), जागरण (18 अक्टूबर 2026), किसान इंडिया (18 अक्टूबर 2026)
